बिहार के सैकड़ों सरकारी स्कूल में लागल चापाकल के पानी पीअला से कैंसर हो सकता, जांच रिपोर्ट से खुलासा

बिहार के सैकड़ों सरकारी स्कूल में लागल चापाकल के पानी पीअला से कैंसर हो सकता, जांच रिपोर्ट से खुलासा

आर्सेनिक जईसन जहर के चलते चमड़ा, फेफड़ा अऊरी किडनी के कैंसर समेत बहुत प्रकार के गंभीर बेमारी के बीच जीअत बिहार के लोग उज्ज्वल भविष्य खाती अपना बच्चा के स्कूल भेजतारे। लेकिन अब त स्कूल जाए वाला बच्चा तक आर्सेनिक नाम के ए जहर में घोराए लागल बाड़े।

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के ओर से भईल जांच के मुताबिक राज्य के बहुत जिला के पानी पीये लायक नईखे। खास तौर प स्कूल में लागल चापाकल के पानी त खतरा के सीमा से बहुत आगे बढ़ चुकल बा।

राज्य के समस्तीपुर जिला के 250 से जादे स्कूल में लागल चापाकल के पानी में बहुत प्रकार के जहरीला चीज़ मिलल बा। पानी में घोराईल इ सभ चीज़ शरीर के संगे-संगे दिमाग के भारी नुकसान पहुंचावता।

विभाग के ओर से जारी भईल पानी के जांच रिपोर्ट में कहल बा कि जिला के अलग-अलग प्रखण्ड के करीब 400 सरकारी स्कूल में लागल चापाकल के पानी के जांच भईल, जवना में 250 से जादे स्कूल के पानी एकदम पीये लायक नईखे।

जांच रिपोर्ट में समस्तीपुर के पटोरी, विद्यापतिनगर, मोहिउद्दीनगर आ मोहनपुर अधिकांश स्कूल के पानी के बच्चा के स्वास्थ्य खाती नुकसान पहुंचावे वाला बतावल बा। रिपोर्ट के मुताबिक ए इलाका के चापाकल के पानी में आयरन, फ्लोराइड, क्लोरीन जईसन चीज़ खतरनाक स्तर से ऊपर मिलल बा।

विभाग के ओर से रिपोर्ट जारी होखला के बाद समस्तीपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी सत्येंद्र झा कहले कि सरकार के 'सात निश्चय योजना' के तहत हरेक स्कूल में साफ अऊरी शुद्ध पानी के व्यवस्था कईल जाता।

मालूम रहे कि बिहार के 40 में से 18 से अधिक जिला के पानी में आर्सेनिक नाम के जहरीला रसायन मिलल बा। बतावल जाता कि आर्सेनिक के ना त त कवनो रंग होखेला, ना स्वाद, ना गंध, जवना के चलते बिना विशेष जांच के एकर पुष्टि नईखे हो सकत।

डॉक्टर के मुताबिक जदी शरीर प चकता बने, तरहथी (हथेली) आ तरवा (तलवा) के चमड़ा मोट हो जाए अऊरी गांठ बने लागे त समझ लेवे के चाही कि शरीर में आर्सेनिक के मात्रा बढ़ गईल बा अऊरी एकर तुरंत जांच करावे के चाही।

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