15 जनवरी 2026

साहित्यिक कीर्तिमान और युवा संघर्ष: चोसुन इल्बो प्रतियोगिता का अभूतपूर्व वर्ष

“मिल सके आसानी से उसकी ख्वाहिश किसे है, जिद्द तो उसकी है जो मुक़द्दर में लिखा ही नहीं है। दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं, तूफ़ानों में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं।”

ये पंक्तियां उन आठ लेखकों की मनोदशा को बयां करने के लिए काफी हैं जिन्होंने एक असंभव सी दिखने वाली साहित्यिक लड़ाई जीती है। जब 2026 की ‘चोसुन इल्बो न्यू ईयर लिटरेरी कॉन्टेस्ट’ के विजेताओं को उनकी जीत की सूचना देने के लिए फोन किया गया, तो पहली प्रतिक्रिया खुशी की नहीं, बल्कि संदेह की थी। “एक मिनट रुकिए, क्या आप सच में चोसुन इल्बो से बोल रहे हैं?” अधिकतर विजेताओं को लगा कि यह कोई ‘वॉयस फिशिंग’ या ठगी का कॉल है। उनका यह अविश्वास जायज भी था, क्योंकि हाल ही में व्यक्तिगत जानकारी लीक होने की घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन इसका मुख्य कारण प्रतियोगिता का विकराल स्तर था। 15 दिसंबर, 2025 के अखबार में छपी खबर के अनुसार, इस साल रिकॉर्ड 13,612 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिससे सफलता की संभावना न के बराबर लग रही थी।

युवा रक्त का दबदबा

इस वर्ष के नतीजों में सबसे चौंकाने वाला पहलू विजेताओं की उम्र है। साहित्य के इस महाकुंभ में युवा पीढ़ी ने पुराने दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। आठों विजेताओं की औसत आयु महज 28.9 वर्ष है, जो अपने आप में एक नया कीर्तिमान है। इनमें से तीन विजेता तो ऐसे हैं जिनका जन्म 2000 के दशक में हुआ है। हाल के वर्षों में यह पहली बार है जब सभी विजेता 20 और 30 वर्ष की आयु सीमा के भीतर हैं। इस युवा ऊर्जा ने प्रतियोगिता के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

किशोरावस्था से परिपक्वता तक का सफर

इस साल की सबसे कम उम्र की विजेता, 20 वर्षीय ली सू-बिन, एक सिजो (कोरियाई काव्य रूप) कवियत्री हैं। जिस वक्त उन्हें जीत की खबर मिली, वह अपने विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा के परिणामों का इंतजार कर रही थीं। उन्होंने हंसते हुए बताया कि उनकी मां को लगा कि शायद उन्हें किसी विश्वविद्यालय से अतिरिक्त स्वीकृति मिल गई है, इसलिए फोन पर इतनी लंबी बात हो रही है। ली ने मिडिल स्कूल के दिनों से ही गंभीरता से लिखना शुरू कर दिया था और संयोग देखिए, उनके मेंटर वही किम सांग-ग्यू थे जिन्होंने 2017 में इसी अखबार की प्रतियोगिता जीती थी।

वहीं, 22 वर्षीय नाटककार ली हान-जू, जो म्योंगजी प्रोफेशनल कॉलेज में क्रिएटिव राइटिंग की छात्रा हैं, पिछले तीन वर्षों से नाटक लिख रही हैं। यह उनका दूसरा प्रयास था और इतनी जल्दी मिली सफलता ने उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि वह इस क्षेत्र में कुछ बेहतर कर सकती हैं। परियों की कहानियों की लेखिका 21 वर्षीय ह्वांग चा-यंग का नजरिया थोड़ा अलग और भावुक है। वह कहती हैं कि जब भी वह भागना चाहती थीं, किताबों का सहारा लेती थीं और अब वह अन्य बच्चों के लिए अपनी कहानियों के जरिए ‘छिपने की जगह’ बनाती हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने 10 साल के छोटे भाई को दिया, जिसने उन्हें आज के बच्चों की पसंद-नापसंद से रूबरू कराया।

अनुभव और शिक्षण का सामंजस्य

ऐसा नहीं है कि इस दौड़ में केवल बीस साल के युवाओं का ही बोलबाला रहा। 39 वर्षीय बाल कवि सॉन्ग वू-सोक इस साल के सबसे उम्रदराज विजेता हैं, हालांकि वह बच्चों के बेहद करीब हैं क्योंकि वह चेओनान के वाचोन एलीमेंट्री स्कूल में शिक्षक हैं। सॉन्ग का कहना है कि वह उन छोटी-छोटी दुनियाओं का अवलोकन जारी रखेंगे जिन्हें उन्होंने अब तक देखा है और बच्चों की आवाजों को अपनी कविताओं में दर्ज करेंगे।

युवा होने का अर्थ अनुभवहीन होना नहीं है। आंकड़ों पर गौर करें तो आठ में से पांच विजेताओं ने औपचारिक रूप से साहित्य का अध्ययन किया है। 30 वर्षीय कवियत्री योन वू, जिन्होंने 9,015 कविताओं के ढेर में से अपनी जगह बनाई, योनसेई विश्वविद्यालय से कोरियाई साहित्य में मास्टर्स कर चुकी हैं। यह उनका सातवां प्रयास था। अपनी दादी के निधन के बाद लिखी गई उनकी विजेता कविता ‘अ लिटिल लेट, बट इट्स ओके’ तकनीक से ज्यादा भावनाओं पर केंद्रित है। योन वू मानती हैं कि अब वह एक ‘अच्छी तरह लिखी गई कविता’ और एक ‘अच्छी कविता’ के बीच के फर्क को समझने लगी हैं।

इसी तरह, 35 वर्षीय लघु कथाकार किम सन-जुन, जो एक क्रैम स्कूल में पढ़ाते हैं, ने अपनी कहानी ‘द साउंड व्हेन फॉलिंग’ को पिछले तीन वर्षों में कई बार संशोधित किया। उनका मानना है कि वह गर्व करने लायक जीवन के उन पहलुओं को अपने उपन्यासों के माध्यम से व्यक्त करना चाहते हैं जो अक्सर अनकहे रह जाते हैं।